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While it all began quietly and humbly In the form of a few reports and booklets that emerged out of our field work and interaction with children and teachers, it was quickly realized that publishing quality material could be a vital supplement and valuable addition on the way to the goals that we were out to pursue.  We thought it to be an efficient medium to increase the reach of our philosophy and ideas way beyond the restrictions that our limited resources and activist power imposed on us. Bit by bit the caravan of books grew to include educational classics, educational modules for teachers and children, picture books, material for young readers and beginners, activity books, fiction and non-fiction, books on various social issues and so on.

शुरुआत तो धीमे-धीमे हुई थी – कुछ रिपोर्टों और पुस्तिकाओं के साथ जो हमारे फील्ड के काम में बच्चों और शिक्षकों के साथ हुए अनुभवों से उपजे थे। पर जल्द ही हमने यह जाना कि हमारे दूरगामी उद्देश्यों की तरफ जाने वाली राह में अच्छी गुणवत्ता की सामग्री का प्रकाशन एक ज़रूरी और मूल्यवान भूमिका निभा सकता है। यह माध्यम हमारे दर्शन और सोच को हमारे सीमित संसाधनों और मानव क्षमताओं की पहुँच से बहुत आगे तक ले जाने का दमखम रखता है। इस तरह धीरे-धीरे किताबों के कारवाँ में शैक्षिक सन्दर्भ ग्रंथ, शिक्षकों के लिए मॉड्यूल, बच्चों के लिए साहित्य और गतिविधि की किताबें, शुरुआती पाठकों के लिए चित्रकथाएँ, युवा पाठकों के लिए सामग्री ( कथा- व गैर-कथा-साहित्य) और तमाम सामाजिक मुद्दों पर किताबें जुड़ती चली गईं।

अब तो यह कारवाँ, बकौल सफदर हाशमी कह रहा हैः

किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं।

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