यह तो हम जानते हैं कि मास्क लगाना हमें कोविड-19 से सुरक्षा देता है। लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों की तरफ से इस बारे में बहुत कम जानकारी मिली है कि किस तरह के मास्क हमें सबसे अच्छी सुरक्षा देते हैं।
महामारी की शुरुआत में, यूएस सीडीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आम जनता से कहा था कि वे N95 मास्क न पहनें क्योंकि एक तो उस समय इन मास्क की आपूर्ति बहुत कम थी और स्वास्थ्य कर्मियों को इनकी अधिक आवश्यकता थी। और दूसरा, उसी समय यह बात सामने आई थी कि सार्स-कोव-2 का एरोसोल के माध्यम से फैलने का जोखिम कम है। लेकिन इन मास्क की पर्याप्त आपूर्ति और इस वायरस के एरोसोल के माध्यम से फैलने के प्रमाण मिलने के बावजूद स्वास्थ्य एजेंसियां का आम लोगों के लिए कपड़े से बने मास्क लगाने पर ज़ोर रहा।
अब, N95 मास्क, चीन द्वारा निर्मित KN95 मास्क और दक्षिण कोरिया द्वारा निर्मित KF94 मास्क जैसे बेहतर बचाव देने वाले मास्क बाज़ार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं और पहले की तुलना में सस्ते हैं। फिर भी कुछ समय पहले तक सीडीसी ने आम लोगों के लिए इनका उपयोग करने की बात नहीं कही थी। 10 सितंबर को सीडीसी ने कहा कि चूंकि अब N95 और अन्य मेडिकल-ग्रेड के मास्क पर्याप्त रूप से उपलब्ध हैं तो आम लोग भी इस तरह के मास्क पहन सकते हैं। लेकिन प्राथमिकता अब भी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए है। वैसे, कपड़े के मास्क भी स्वीकार्य हैं।
लेकिन किस तरह के मास्क लोगों को बेहतर सुरक्षा देंगे इस बारे में कोई बात नहीं कही गई है। इस सम्बंध में साइंटिफिक अमेरिकन ने कई विशेषज्ञों से बात की। इनमें से कुछ विशेषज्ञों ने बाज़ार में उपलब्ध विभिन्न मास्क का परीक्षण किया है। और उनका कहना है कि स्वास्थ्य अधिकारियों को लोगों को यह बताना चाहिए कि लोगों को अच्छी तरह से फिट होने वाले और बाहरी कणों को मास्क के भीतर जाने से रोकने की उच्च क्षमता वाले मास्क पहनने की ज़रूरत है। खासकर तब जब तेज़ी से फैलने वाला डेल्टा संस्करण मौजूद है और लोग बंद जगहों पर अधिक समय बिता रहे हैं।
अच्छा मास्क
कोई मास्क अच्छा होगा यदि वह अधिक से अधिक बाहरी कणों या बूंदों को पार जाने से रोके, चेहरे पर अच्छी तरह फिट हो और नाक और मुंह के आसपास कोई खाली जगह न छोड़े, और उसे पहनने से सांस लेने में दिक्कत न हो। मसलन, N95 मास्क कम से कम 95 प्रतिशत कणों को पार जाने से रोकता है। लेकिन यदि यही मास्क चेहरे पर ढीला-ढाला रहेगा तो यह उतनी अच्छी सुरक्षा नहीं दे सकेगा। और यदि मास्क ऐसा हो जिसे लगाने पर सांस में तकलीफ जैसी दिक्कत लगे तो भी लोग इसे नहीं लगाएंगे, और संक्रमण का जोखिम बढ़ेगा।
स्वास्थ्य एजेंसियों ने इस बारे में भी कुछ नहीं कहा है कि किस ब्रांड के मास्क सर्वोत्तम सुरक्षा देते हैं। लेकिन कुछ शौकिया लोगों ने इस बारे में जानकारी उपलब्ध कराई है। एरोसोल विज्ञान की पृष्ठभूमि वाले एरोन कोलिन्स उर्फ ‘मास्क नर्ड’ सीगेट टेक्नोलॉजी में मैकेनिकल इंजीनियर हैं। अपने खाली समय में वे यूट्यूब वीडियो बनाते हैं जिनमें वे विभिन्न मास्क निर्माताओं द्वारा बनाए गए मास्क का परीक्षण और समीक्षा करते हैं।
कोलिन्स ने बाथरूम में एक मास्क-परीक्षण सेटअप लगा रखा है, जहां वे सोडियम क्लोराइड (नमक) के एरोसोल बनाते हैं और यह मापते हैं कि कौन सा मास्क इन्हें रोकने की कितनी क्षमता रखता है।
कोलिन्स ‘प्रेशर ड्रॉप’ का भी परीक्षण करते हैं जो दर्शाता है कि किसी मास्क से सांस लेने में कितनी सुविधा है। उनके अनुसार कुछ कपड़े के मास्क - जिनमें कॉफी फिल्टर से बने मास्क भी शामिल हैं – से सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए N95 मास्क कपड़े से नहीं बने होते।
आम तौर पर वे चीन की कंपनी पॉवेकॉम और अन्य द्वारा बनाए गए KN95 मास्क, ब्लूना फेस फिट के KF94 मास्क और 3M, मोल्डेक्स या हनीवेल द्वारा बनाए गए N95 मास्क की सिफारिश करते हैं। इन सभी मास्क की कणों को रोकने की क्षमता 99 प्रतिशत है, और उनके परीक्षण के आधार पर इन्हें पहनने पर सांस लेने में तकलीफ भी नहीं होती। जबकि अच्छी फिटिंग वाले सर्जिकल मास्क की कणों को रोकने की क्षमता लगभग 50 से 75 प्रतिशत है और एक अच्छे कपड़े के मास्क की लगभग 70 प्रतिशत। लेकिन अच्छा मास्क चुनने में आराम एक निर्णायक कारक होना चाहिए।
इसके अलावा डेल्टा संस्करण के लिए वे सर्जिकल मास्क को उतना बेहतर नहीं मानते, यहां वे KN95 या KF94 जैसे मास्क को ज़रूरी बताते हैं। वैसे कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सर्जिकल और कपड़े के मास्क कोविड-19 के खिलाफ कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं। बांग्लादेश में हाल ही में हुए एक बड़े रैंडम अध्ययन में पाया गया कि सर्जिकल मास्क ने संक्रमण के जोखिम को काफी कम किया; कपड़े के मास्क को लेकर अस्पष्टता है।
बच्चों के लिए मास्क
अब जबकि बच्चों के स्कूल खुलने लगे हैं तो कई अभिभावकों को बच्चों की चिंता है, विशेषकर उन बच्चों की जो टीकाकरण के लिए अभी बहुत छोटे हैं। इस मामले में कणों को रोकने की उच्च क्षमता वाले मास्क बच्चों के लिए मददगार हो सकते हैं। बच्चों के लिए N95 मास्क के कोई मानक नहीं है, लेकिन कई निर्माता बच्चों के लिए KF94 या KN95 मास्क बना रहे हैं। इस तरह के मास्क छोटे चेहरों पर अच्छी तरह फिट होने के लिए और आसानी से पहने जाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कोलिन्स के अनुसार ऐसा कोई कारण नहीं दिखता है कि बच्चे मास्क बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। उनका बेटा गर्मी के पूरे मौसम में मास्क पहने रहा।
कहां मिलेंगे
सीडीसी ने चेतावनी दी है कि यूएस में बिकने वाले KN95 मास्क में से लगभग 60 प्रतिशत मास्क नकली हैं। समस्या यही है कि भारत में इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है कि अच्छे मास्क कहां से खरीदे जाएं।
दोबारा उपयोग
KN95 जैसे मास्क लगाने में लोग इसलिए भी अनिच्छुक हैं क्योंकि आम तौर पर इन मास्क को डिस्पोज़ेबल माना जाता है। लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तव में इन्हें कई बार पहना जा सकता है। इस तरह के मास्क को आप तब तक उपयोग करते जा सकते हैं जब तक ये फट न जाए या गंदे न हो जाएं। कोलिन्स के परीक्षण के अनुसार ये मास्क 40 घंटे तक उपयोग किए जा सकते हैं, और इतनी देर में इनकी कणों को रोकने की क्षमता में कोई कमी नहीं आती। लेकिन पैकेट से निकालने के छह महीने के भीतर उपयोग कर लेना चाहिए। वैसे तो, इन मास्क पर वायरस लंबे समय तक जीवित नहीं रहते हैं इसलिए कुछ दिन छोड़कर दोबारा उपयोग में कोई बुराई नहीं है।
डबल मास्क
प्रभावशीलता बढ़ाने का एक प्रचलित तरीका है सर्जिकल मास्क के ऊपर कपड़े का मास्क पहनना। लेकिन वास्तव में यह जोड़ कितनी अच्छी तरह काम करता है?
कोलिन्स ने पाया कि यह तरीका 90 प्रतिशत से अधिक कणों को भीतर जाने से रोकता है। लेकिन अकेले N95 की तुलना में इस तरीके में सांस लेने में दिक्कत होती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं कि N95 सरीखे मास्क सभी के लिए ज़रूरी हैं। वे सर्जिकल मास्क या कपड़े के मास्क की सिफारिश करते हैं।
दाढ़ी-मूंछ
इस पर बहुत अधिक डैटा नहीं है, लेकिन कुछ शोध बताते हैं कि किसी व्यक्ति की दाढ़ी या मूंछें जितनी बड़ी होंगी मास्क उतना ही कम प्रभावी होगा। बहरहाल सुविधा एक महत्वपूर्ण कारक है। (स्रोत फीचर्स)