Sandarbh - Issue 166 (September-October 2026)
Vavilovian Mimicry by Sanket Raut Download Entire Magazine
वाविलोवियन अनुकरण - संकेत राउत [Hindi,PDF]
आप खेत में सूरजमुखी उगाना चाहते हैं, मगर न जाने कैसे साथ में जंगली सूरजमुखी भी उग आता है! ऐसा कैसे हुआ होगा? कहीं जंगली सूरजमुखी ने खेती किए जाने वाले सूरजमुखी की नकल करके आपको धोखा तो नहीं दे दिया? यह कैसी नकल है जिसके तीन ध्रुव हैं? नकल की अकल की बात करने वाले संकेत राउत अपनी शृंखला के इस लेख में वाविलोवियन अनुकरण की फसल बोते हैं। पढ़कर देखिए।- How to Grow Human Bones by Carly Anne York
मानव हड्डियाँ कैसे विकसित करें: आधुनिक बोन ग्राफ्ट में कोरल की एक आश्चर्यजनक भूमिका - कार्ली ऐनी यॉर्क [Hindi,PDF][English,PDF]
यह लेख आपको बोन ग्राफ्टिंग के इतिहास के बड़े दिलचस्प सफर पर ले चलता है। कुछ साढ़े तीन सौ साल पहले किसी की टूटी खोपड़ी में कुत्ते की खोपड़ी से हड्डी जोड़ी गई थी (उस खुश्किस्मत इन्सान की बदकिस्मती भी दिलचस्प है, लेख में पढ़िए)। उस कुत्ते की खोपड़ी से बोन ग्राफ्टिंग की शुरुआत के बाद बेहतर विकल्पों की तलाश किस तरह हमें कोरल तक ले आई, कार्ली ऐनी यॉर्क इस लेख में बखूबी बताती हैं। - Isomerism in Carbon Compounds by Uma Sudhir
कार्बन यौगिकों में सम-अवयवता उर्फ आइसोमरिज़्म - उमा सुधीर [Hindi,PDF]
दो कार्बन यौगिक – दोनों का यौगिक फॉरमुला एक-सा, दोनों के आणविक बन्ध भी एक-से, मगर अणुओं की स्थानिक जमावट अलग-अलग। ऐसे में, इन यौगिकों से बनते तत्व क्या एक-से होंगे, या वे भी अलग-अलग? हो सकता है, एक ध्रुवीकृत प्रकाश के तल को क्लॉकवाइज़ घुमाता हो, और दूसरा, एंटी-क्लॉकवाइज़? या फिर, एक से पुदीने को महक मिलती हो, और दूसरे से शाहजीरे को? उमा सुधीर, इस लेख की लेखक, को कार्बन और उसकी इस बहुमुखी प्रतिभा से बड़ा प्यार है। उनके इसी प्यार को जायज़ ठहराने की कोशिश का नतीजा यह लेख है। पढ़कर देखिए, क्या आपका बन्ध भी कार्बन से जुड़ता है? - The Wonders of a Kamaal by Aamod Karkhanis
कमाल का कमाल - आमोद कारखानीस [Hindi,PDF]
प्राचीन काल से समुद्र के रास्ते इन्सान दुनिया के एक छोर से दूसरे छोर तक आवागमन और व्यापार करते आए हैं। मगर समुद्र के बेरहम सफर पर, आधुनिक यंत्रों और टेक्नोलॉजी के बिना यह सब कैसे मुमकिन हुआ करता था? उसे मुमकिन करने वाला ज्ञान कैसे विकसित हुआ करता होगा? आमोद कारखानीस अपने इस लेख में ऐसे सवालों का रोचकता से जवाब देते हैं। - How Wordless Books Opened a Space for Children to Express by Neelansh Sethi
बिन शब्दों का अर्थ: कैसे शब्दहीन किताबों ने बच्चों को अभिव्यक्ति के लिए जगह दी - नीलांश सेठी [Hindi,PDF][English,PDF]
क्या केवल शब्दों से ही अर्थ गढ़े जाते हैं? चित्र भी तो कहानियाँ कहा करते हैं। और जब उन कहानियों को बच्चे अपनी-अपनी तरह से देखते-समझते हैं, तब उनकी (और उनके सहजकर्ता की) शिक्षा के सफर में किस तरह के मोड़ और मुकाम आते हैं, यह देखने-समझने के लिए ‘पढ़िए’ नीलांश सेठी का यह लेख। - A Book Showcasing Children’s Trends in Learning to Write/ Tum Aise Likhte Ho – A Book Review by Kamlesh Chandra Joshi
बच्चों के लिखना सीखने के रुझान को दिखाती किताब - कमलेश चन्द्र जोशी [Hindi,PDF]
रश्मि पालीवाल द्वारा लिखित किताब तुम ऐसे लिखते हो? की समीक्षा कमलेश चन्द्र जोशी का यह लेख करता है। कमलेश इसके लिए बाल विकास और भाषा शिक्षण की अवधारणाओं के पैमानों का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही, किताब के कई पहलुओं की बारीकी से परख करते हैं। समीक्षा पढ़कर आप किताब पढ़ने के अपने रुझान को परख सकते हैं। - In Remembrance of Professor Shereen by Rashmi Paliwal
प्रोफेसर शिरीन की याद में - रश्मि पालीवाल [Hindi,PDF]
सामाजिक विज्ञान के स्कूली शिक्षण में शिक्षार्थियों को जानकारियाँ देना ठीक होगा, या जानकारी निर्मित करने के अवसर देना? या फिर, स्कूली शिक्षकों और शिक्षार्थियों के लिए अकादमिक ज्ञान को आम बोलचाल की भाषा में इस्तेमाल करना बेहतर होगा या सटीक, भले ही क्लिष्ट, अकादमिक भाषा में? रश्मि पालीवाल इन उलझनों और दुविधाओं के सामने खड़े होकर शिरीन को याद कर रही हैं, श्रद्धांजलि दे रही हैं। - Livelihood in a Chalcolithic Village by Shereen Ratnagar and Ajay Dandekar
एक ताम्रपाषाण युगीन गाँव का जीवन निर्वाह - शिरीन रत्नागर व अजय दांडेकर [Hindi,PDF]
पुणे के डेक्कन कॉलेज में संग्रहित हैं ईनामगाँव का एक पुरावशेष – दो जुड़े हुए घड़े। दरअसल, इनके अन्दर मृत इन्सानों को दफनाया जाता था। इस तरह के पुरावशेषों के मिलने पर उस दौर की कल्पना किस आधार पर की जाती होगी? क्या पुरातत्व ज्ञान में केवल पूरे अवशेषों का ही महत्व है? कूड़े-करकट के पुरावशेषों की अहमियत नहीं? जानने के लिए पढ़िए शिरीन रत्नागर व अजय दांडेकर द्वारा लिखित पुस्तक भारतीय इतिहास के स्रोत: प्राचीन काल - भाग 1 का यह अंश। - The Merger and Closure of Government Schools by Arvind Sardana and Priyanta Ghosh
शासकीय स्कूलों का विलय और बन्द होना - अरविंद सरदाना और प्रियंता घोष [Hindi,PDF]
सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर से भरोसा क्यों उठता जा रहा है? बढ़ती तादाद में इन स्कूलों के बन्द होने या आपसी विलय से किन पर, क्या, और कितना असर पड़ रहा है? अतिथि शिक्षकों की भरमार, राजनीतिक दबावों के चलते तबादले, खाली कक्षाएँ, और शहरी-ग्रामीण खाई – ये चन्द कारक हैं भारतीय शिक्षा तंत्र, खास तौर पर मध्य प्रदेश के शिक्षा तंत्र, की मौजूदा स्थिति और समस्या को समझने के लिए। इन, और इनसे जुड़े अन्य, कारकों के जंजाल को आँकड़ों की मदद से समझने और सुलझाने की कोशिश अरविंद सरदाना और प्रियंता घोष इस लेख में करते हैं। - Troy Ka Ghoda by Jayant Vishnu Narlikar
ट्रॉय का घोड़ा - जयंत विष्णु नारलीकर [Hindi,PDF]
दशकों पहले पृथ्वी से भेजा एक यान आज पृथ्वी की ओर लौटता नज़र आने लगता है। पृथ्वी के खगोल वैज्ञानिक विस्मय से झूम उठते हैं। मगर डॉ. फ्लेमिंग के चहरे पर शिकन किस बात की आ जाती है? विज्ञान और रोमांच का तालमेल जयंत विष्णु नारलीकर की कथाओं में ज़रूर दिखता है। इस बार, इस तालमेल में ग्रीक मिथक भी जुड़ जाते हैं। पढ़कर देखिए, इफ इट मैटर्स। - Why Don’t We Feel Pain When We Cut Our Hair and Nails? From Sawaliram
बाल और नाखून काटने पर हमें दर्द क्यों नहीं होता? – सवालीराम [Hindi,PDF]
बाल नोचने और नाखून उधेड़ने पर ज़रूर बहुत दर्द होता है! मगर उन्हें काटने पर क्यों नहीं? सवालीराम शरीर के इस रहस्य पर से परदा उठाएँगे। आप भी बाल की खाल निकालने की उनकी आदत में शरीक हो जाइए, इस लेख को पढ़कर।
