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चित्र: शुभांगी चेतन
बोला नन्हा झाड़ एक दिन
अपने अब्बू झाड़ से...
महरूम अम्मा की दो निशानियाँ — सबा खान
चित्र: प्रोइति रॉय
सबा की यह कहानी हमें उस पुराने घर में ले जाती है, जहाँ 28 पेड़ों से घिरे आँगन में अब सिर्फ कुछ ही पेड़ बचे हैं—जो अम्मा और अब्बा के लिए गुज़री पीढ़ियों की निशानियाँ हैं। एक परिवार, पेड़ों और यादों की दिल छू लेने वाली कहानी।
एक विद्रोह ऐसा भी... 2 — दक्कन रैयतों का विद्रोह — सी. एन. सुब्रह्मण्यम्
2020-21 में हुए किसान आन्दोलन के बारे में आपने सुना-पढ़ा होगा। इतिहास में भी किसानों द्वारा अपने शोषण के खिलाफ आन्दोलन और विद्रोह के अनेकों उदाहरण देखने को मिलते हैं। इस सीरिज़ में लेखक इतिहास में हुए इस तरह के किसान विद्रोहों के किसी एक उदाहरण पर बातचीत करेंगे। यह सीरिज़ आपको इतिहास के एक अनदेखे पहलू से रूबरू कराएगी।
इस अंक में जानिए महाराष्ट्र के साहूकारों के खिलाफ किसानों के विद्रोह के बारे में...।
गतिविधि कोना — क्यों-क्यों
इस कॉलम में हर बार हम बच्चों से एक सवाल पूछते हैं जिसका जवाब उन्हें अपने हिसाब से, अपने शब्दों में देना होता है। पिछली बार का सवाल था— “बड़ों की बात माननी चाहिए वो भी अक्सर बिना सवाल किए। क्या तुम्हें भी ऐसा लगता है, और क्यों? और क्या तुम चाहोगे कि तुम्हारी बात भी लोग बिना सवाल किए मानें, और क्यों?”कई बच्चों ने अपने दिलचस्प जवाब हमें भेजे। इनमें से कुछ आपको यहाँ पढ़ने को मिलेंगे। साथ ही बच्चों के बनाए कुछ चित्र भी देखने को मिलेंगे।
हमारा जवाब — सभी पत्तियाँ एक जैसी... — किशोर पंवार
चित्र: कनक शशि
पिछली बार ‘क्यों-क्यों’ कॉलम में हमने पूछा था कि “सभी पत्तियाँ एक जैसी क्यों नहीं होतीं?” यहाँ पेश है इस सवाल के लिए हमारा जवाब...
फिल्म चर्चा — अप — निधि गुलाटी
इस बार की चर्चा एनिमेशन फिल्म अप के बारे में है। फिल्म का मुख्य किरदार कार्ल, उसकी पत्नी और दोस्त पैराडाइज़ फॉल्स की तलाश में हैं। इसके लिए वे काफी प्रयास करते हैं। क्या वो अपने प्रयास में सफल हो पाते हैं... जानने के लिए पढ़ें यह दिलचस्प लेख।
यह लेख फिल्म के विविध तकनीकी पहलुओं से भी आपका परिचय कराता है।
अरशद की कचौड़ियाँ — सुशील शुक्ल
चित्र: प्रिया कुरियन
फूले गुलाब फूले गेंदे रातरानियाँ
फूले चमेली फूलों की सुन लीं कहानियाँ
अरशद की कचौड़ियों को अगर देख ले कोई
खिले फूलों के चेहरों पे उतर आएँ झाइयाँ...
बरस रहा है — शशि सबलोक
चित्र: प्रोइति रॉय
बारिश से जुड़ी साधारण घटनाओं के जरिए इन्सानी भावनाओं को बारीकी से चित्रित करता एक खूबसूरत लेख। इसमें शशि सबलोक बारिश के बहाने उन हलचलों को बयाँ करती हैं जो हमें रोज़ दिखती हैं लेकिन जिनका जादू हम अक्सर नज़रअन्दाज़ कर जाते हैं। यह लेख पाठक को ठहरकर प्रकृति के इस जादू को महसूस करने का अवसर भी देता है।
गतिविधि कोना — अन्तर ढूँढो
चित्र: दिव्या आर्या, उत्तराखण्ड
एक जैसे दिखने वाले दो चित्रों में अन्तर खोजने की मशक्कत।
मेहमान जो कभी गए ही नहीं — भाग 5 — आर एस रेश्नू राज, ए पी माधवन, टी आर शंकर रमन, दिव्या मुडप्पा, अनीता वर्गीस और अंकिला जे हिरेमथ
रूपान्तरण व अनुवाद: विनता विश्वनाथन
चित्र: रवि जाम्भेकर
इस सीरिज़ में हम आसपास पाए जाने वाले कुछ ऐसे आक्रामक एलियन पौधों के बारे में चर्चा करेंगे जो बाहर से आए और हमारे देश में बस गए। इस चर्चा में हम इन पहलुओं को शामिल करेंगे कि ये पौधे कहाँ से आए, कैसे आए, इनके खास गुण क्या हैं, इन्हें कैसे व्यवस्थित किया जाए इत्यादि। इस बार बात हो रही है सत्यानाशी पौधे की।
गतिविधि-कोना — चित्रपहेली
चित्रों में दिए इशारों को समझकर पहेली को बूझना।
गतिविधि-कोना — भूलभुलैया
दिए गए कई रास्तों में से सही रास्ते को चुनने की जद्दोजहद।
गतिविधि-कोना — माथापच्ची
कुछ मज़ेदार सवाल और पहेलियों से भरे दिमागी कसरत के पन्ने।
बारिस की बात — सीमा
चित्र: वसुन्धरा अरोड़ा
लगभग सभी बच्चे स्कूल से छुट्टी मिलने पर खुश होते हैं, पर यहाँ तो बात कुछ और ही है। भरी बारिश में भी स्कूल जाने की चाहत क्या रंग लाती है जानने के लिए पढ़िए बुन्देलखण्डी भाषा की मिठास भरपूर यह मज़ेदार किस्सा।
पॉपकॉर्न की खोज कैसे हुई?
क्या आपने कभी सोचा है कि पॉपकॉर्न की खोज कैसे हुई होगी? क्या पॉपकॉर्न सालों पहले भी मनुष्य के भोजन का हिस्सा था? जानने के लिए पढ़िए पॉपकॉर्न की खोज का रोमांचक इतिहास।
बच्चों की रचनाओं के पन्ने — मेरा पन्ना
कविता: काला बादल – पूजा अहिरवार
लेख व कहानी: मौसम की मार – रेशमी नर्रे, जोंकों का मौसम – आरती गोस्वामी, जंगल जलेबी – केतकी सोनकर, बारिश बनी आफत – तरुण चन्द, हमारा मोबाइल खो गया – सदफ फारूकी, मेरा टॉमी - गया।
चित्र: शांति, यश सिंह, प्रेमा आर्या, ध्रुवी आर्या, निधि, रिशिका देशमुख, माहिरीन।
तुम भी जानो
इस बार जानिए: दुनिया का सबसे उबाऊ खेल।
अब देर रात नहीं मिलेगी आइसक्रीम
भूलभुलैया
दिए गए कई रास्तों में से सही रास्ते को चुनने की जद्दोजहद।

