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हाथी चल्लम चल्लम – श्रीप्रसाद
हल्लम हल्लम हौदा
हाथी चल्लम चल्लम
हम बैठे हाथी पर
हाथी चल्लम चल्लम

कविता डायरी – 2 – ऊँघ रहीं बत्तियाँ... - सुशील शुक्ल
चित्र: कनक शशि
कविता डायरी नाम का यह कॉलम कविताओं की दुनिया में झाँकने के एक झरोखे जैसा है। इस कॉलम में हम कविताओं की बुनावट, कविताओं में किए गए शब्दों के खेल, कविताओं के सौन्दर्य, उनके अर्थों की परतें खोलने आदि के इर्द-गिर्द बात करेंगे।
इस बार की चर्चा का केन्द्र नवीन सागर की कविता ‘माँ का गीत’ है। 

एक हिम तेन्दुए से हमारी मुठभेड़ – शेराब लोबज़ैंग
चित्र: तनुश्री रॉय पॉल
अनुवाद: विनता विश्वनाथन
चौदह साल की उम्र में जब शेराब पहली बार अपने भाई के साथ मवेशियों को चराने गईं तो उनका सामना एक हिम तेन्दुए से हुआ। हिम तेन्दुए ने उनकी एक बकरी को पकड़ लिया था। अपने भाई के साथ मिलकर उन्होंने बकरी को बचाने के कुछ प्रयास किए। क्या वे अपने प्रयासों में सफल हुए?
पढ़िए, शेराब के बचपन के सबसे रोमांचक और डरावने दिन का संस्मरण।

गणित है मज़ेदार – रोचक संख्याएँ - भाग 1 – आलोका कान्हेरे
चित्र: मधुश्री
अनुवाद: कविता तिवारी
इन पन्नों में हम ऐसी चीज़ें देने की कोशिश करते हैं जिन्हें हल करने में आपको मज़ा आए। ये पन्ने खास उन लोगों के लिए हैं जिन्हें गणित से डर लगता है।
इस बार आलोका फिबोनाची संख्याओं के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारियों के साथ-साथ इससे जुड़ी कुछ गतिविधियाँ हमसे साझा कर रही हैं। 

गतिविधि-कोना — चित्रपहेली
चित्रों में दिए इशारों को समझकर पहेली को बूझना।

कला के आयाम – एक वाकया और एक प्रदर्शनी – शेफाली जैन
इस बार शेफाली हमारा परिचय आशीष पलई नामक एक कलाकार से करवा रही हैं। आशीष ने अपनी ज़्यादातर कलाकृतियाँ मिट्टी, गोबर, बाँस आदि से बनाई हैं। आशीष की इन कलाकृतियों के ज़रिए शेफाली कला में माध्यम और जगह की भूमिका पर भी चर्चा कर रही हैं। 

रेत के कीड़े – विमल चित्रा
चित्र: मयूख घोष
रेत-कलर का लिबास ओढ़े
छिपे हुए हैं, यहीं कहीं हैं
चलेंगे जिस दम दिखाई देंगे
अभी यहाँ हैं, अभी नहीं हैं 

अमन की कुछ बातें – ‘तुमने ऐसा किया’ कहना... – अमन मदान
चित्र: कनक शशि
किसी मतभेद के दौरान जब हम ऐसे बात करते हैं कि दूसरे पर जैसे आरोप लगा रहे हैं तो अक्सर बात और बिगड़ जाती है। क्या किसी और तरीके से अपनी बात कहने से मतभेदों को सुलझाना आसान हो सकता है? जानने के लिए पढ़िए... 

पिक्चर पोस्टकार्ड की ज़िन्दगी में अनेक साथी – शिवकुमार गांधी
चित्र: प्रोइति राय
लीनी के पास एक पिक्चर पोस्टकार्ड है जो उसे उसके दोस्त शिबु ने दिया था। इस पिक्चर पोस्टकार्ड में लीनी को कौन-कौन से साथी मिलते हैं, जानने के लिए पढ़िए यह कहानी। 

गतिविधि-कोना — क्यों-क्यों
इस कॉलम में हर बार हम बच्चों से एक सवाल पूछते हैं जिसका जवाब उन्हें सही-गलत की परवाह किए बिना अपने मन से देना होता है। इस बार का सवाल था: घरवालों या दोस्तों से गुस्से में बात करने या झगड़ा करने के बाद क्या कभी तुम्हें अफसोस हुआ है? क्या तुम्हें लगता है कि कोई अलग तरीका अपनाने से मसला सुलझ सकता था, कैसे और क्यों?
कई बच्चों ने अपने दिलचस्प जवाब हमें भेजे। इनमें से कुछ आपको यहाँ पढ़ने को मिलेंगे। साथ ही बच्चों के कुछ चित्र भी देखने को मिलेंगे। 

गतिविधि-कोना — माथापच्ची
कुछ मज़ेदार सवाल और पहेलियों से भरे दिमागी कसरत के पन्ने।

बच्चों की रचनाओं का कोना — मेरा पन्ना
लेख व कहानी: मेरा छोटू – अमन वर्मा, मैंने दीवाली ऐसे मनाई – राखी यादव, वह डरावना समन्दर – अराइना सुखीजा, पेड़ों का दर्द – बसन्ती कुरामी, पेड़ – अनुराधा, तनुजा मेरी पक्की दोस्त – दिया तहवाल
चित्र: अनुष्का, आर्विन, उमा, महक, अंकुश 

तुम भी जानो
इस बार जानिए:
विनोद कुमार शुक्ल को पैन/नाबोकॉव पुरस्कार
डूडल मिले कुछ बहुत पुरानी किताब में 

गतिविधि-कोना — भूलभुलैया
दिए गए कई रास्तों में से सही रास्ते को चुनने की जद्दोजहद।