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तुम भी बनाओ – आम की गुठली से फ्लेमिंगो – रोहित कोकिल
क्या पुरानी, बेकार पड़ी चीज़ें सच में बेकार होती हैं? ज़रा-सी कल्पना और जुगाड़ से बेकार चीज़ों को काम की और सुन्दर चीज़ों में बदला जा सकता है।
इस बार रोहित आम की सूखी गुठली से फ्लेमिंगो बनाने का तरीका बता रहे हैं।
गतिविधि कोना – भूलभुलैया
चित्र: नरेश पासवान
दिए गए कई रास्तों में से सही रास्ते को चुनने की जद्दोजहद।
आलसी आदमी के सम्मान में – यायावर उर्फ रमेश बिल्लौरे
चित्र: प्रशान्त सोनी
बारिश हो, सर्दी हो या गर्मी—हर मौसम का मज़ा सब के लिए अलग-अलग होता है। इस कविता में मिलिए एक ऐसे आदमी से, जो हर मौसम में कुछ न करने का नया बहाना ढूँढ लेता है। उसकी बातों की एक झलक देखिए—
बारिश! वाह, इससे अच्छा मौसम भी
कोई होता है
कुछ न करने के लिए बहाना
इससे अच्छा भी कोई होता है
बस, लेटे हुए
बीते सारा दिन…
दुनिया का सबसे पुराना तैरता शहर – मिट्टी, पानी और लकड़ी पर खड़ा वैनिस शहर
ऐना ब्रैसनिन
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई शहर पानी के बीच 1600 साल से भी ज़्यादा समय तक कैसे टिका रह सकता है? इस लेख में जानो कि वेनिस की इमारतों के नीचे छिपा 'उल्टा जंगल' इंजीनियरिंग का यह कमाल कैसे करता है।
इस कॉलम में हर बार हम बच्चों से एक सवाल पूछते हैं, जिसका जवाब उन्हें सही-गलत की परवाह किए बिना अपने मन से देना होता है। इस बार का सवाल था: “यदि तुम्हें इन्सान की बजाय और कुछ भी बनने का मौका मिले तो तुम क्या बनना चाहोगे, और क्यों?”
कई बच्चों ने अपने दिलचस्प जवाब हमें भेजे। इनमें से कुछ आपको यहाँ पढ़ने को मिलेंगे। साथ ही बच्चों के बनाए कुछ चित्र भी देखने को मिलेंगे।
बतूता का जूता – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
चित्र: प्रशान्त सोनी
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की यह मज़ेदार कविता तुम्हें कल्पना की एक अनोखी दुनिया में ले जाएगी।
बतूता का जूता – एक टिप्पणी – प्रभात
कविता सिर्फ़ शब्दों से नहीं बनती, वह हमारे मन में एक पूरी दुनिया भी रच देती है। 'इब्न बतूता' पढ़ते हुए जैसे-जैसे कविता आगे बढ़ती है, आँखों के सामने एक के बाद एक मज़ेदार दृश्य खुलते जाते हैं। इस लेख में प्रभात इस कविता की कल्पनाशीलता और उसके रचे दृश्य संसार को टटोलते हैं।
बतूता का जूता – एक टिप्पणी – नरेश सक्सेना
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई कविता पढ़ते ही ज़ुबान पर क्यों चढ़ जाती है? कविता का मज़ा सिर्फ उसके शब्दों में नहीं, उसकी लय, ध्वनियों और कल्पना में भी छिपा होता है। 'इब्न बतूता' के बहाने नरेश जी कविता के इन पहलुओं पर सोचने का मौका देते हैं।
हूबहू एक जैसे दिखने वाले दो चित्रों में छिपे हुए अन्तरों को ढूँढने की मज़ेदार गतिविधि।
दी गई ग्रिड को आयतों और वर्गों में बॉंटने की एक मज़ेदार तर्क आधारित पहेली के बारे में जानो और उसे हल करो।
एक छोटा-सा मशरूम, झमाझम बारिश और ढेर सारे मेहमान। आगे क्या होता है, जानने के लिए पढ़िए यह शब्दरहित चित्रकथा।
आखिर मुसीबत टल ही गई – अफरोज़ जहाँ
चित्र: पंकज साइकिया
मुसीबत आने पर अलग-अलग लोग अलग-अलग ढंग से सोचते और काम करते हैं। इस किस्से में मिलो ऐसे ही कुछ लोगों से जिनकी घबराहट, समझदारी और मज़ेदार हरकतें न सिर्फ तुम्हें गुदगुदाएँगी, बल्कि यह एहसास भी दिलाएँगी कि मुसीबत के समय भी हँसने की वजहें मिल ही जाती हैं।
चित्रों में दिए इशारों को समझकर पहेली को बूझना।
मेहमान जो कभी गए ही नहीं – भाग 21 – आर एस रेश्नू राज, ए पी माधवन, टी आर शंकर रमन, दिव्या मुडप्पा, अनीता वर्गीस और अंकिला जे हिरेमथ
रूपान्तरण व अनुवाद: विनता विश्वाथन
चित्र: रवि जाम्भेकर
इस सीरीज़ में हम आसपास पाए जाने वाले कुछ ऐसे आक्रामक एलियन पौधों के बारे में चर्चा करते हैं जो बाहर से आए और हमारे देश में बस गए। इस चर्चा में हम इन पहलुओं को शामिल करते हैं कि ये पौधे कहाँ से आए, कैसे आए, इनके खास गुण क्या हैं, इन्हें कैसे व्यवस्थित किया जाए इत्यादि।
इस बार बात जानिए – ‘रात की रानी’ के बारे में।
सूरज की चुप्पी
मच्छरदानी क्रान्ति – अफ्रीका से दुनिया भर में – पीयूष सेकसरिया
मच्छरदानी हमेशा से ऐसी नहीं थी जैसी आज है। सदियों के सफर में उसने कई रूप बदले और विज्ञान ने उसे पहले से कहीं ज़्यादा कारगर बना दिया। आखिर यह साधारण-सी जाली इतनी खास कैसे बन गई?
कुछ मज़ेदार सवाल और पहेलियों से भरे दिमागी कसरत के पन्ने।
बच्चों की रचनाओं का कोना – मेरा पन्ना
लेख व कहानी: मेरी क्या गलती है - दीपक बोहरा, हॉकी स्टिक - अनुभव कुमार, खेलने का मन - देव, मुझे कालू याद आता है - रमेश, फैक्ट्री बन्द हो गई - अमरजीत, वह खाना नहीं लाई - मितिशा, अँग्रेज़ी बहुत कमज़ोर है - शिवम कुमार, मेरी तबीयत - आफरीन खान
चित्र: सोनाक्षी, हर्षाली सोमेश्वर येलेवार, मानव इंगले, हिमांशी, शर्विल दिव्यांश, नोआ
इस बार जानिए:
सुपर एल निन्यो की शुरुआत
जिराफ पर बिजली ज़्यादा गिरती है
एक ही जेलीफ़िश, लेकिन देखने का अन्दाज़ बिल्कुल नया। सिमर के इस चित्र में रंग, लहराती रेखाएँ और कल्पना मिलकर इसे जीवन्त बना देते हैं। इस चित्र को देखकर शायद आपके मन में भी समन्दर की कोई नई कहानी जन्म ले।

