Sandarbh - Issue 161 (November-December 2025)
1.Search for Lost Birds by Sanket Raut
सर्च फॉर लॉस्ट बर्ड्स - संकेत राउत [Hindi, PDF]
सर्च फॉर लॉस्ट बर्ड्स - संकेत राउत [Hindi, PDF]
भारत का एक ऐसा नायाब परिन्दा जो सौ से भी अधिक वर्ष पहले विलुप्त घोषित कर दिया गया था, अचानक 1986 में मिल जाता है, और फिर 2008 में खो जाता है। इस दूसरी गुमशुदगी के करीब सोलह साल बाद, 2024 में, संदर्भ में इस पक्षी पर लेख छपता है, और कुछ महीनों बाद, 2025 में, इसे दोबारा खोज लिया जाता है (भले ही अप्रत्यक्ष रूप से)! इत्तिफाक और लुका-छुपी का अजीब खेल जुड़ा है इस जेरडॉन कॉर्सर से। पढ़िए, इसी खेल के बारे में संकेत राउत के इस लेख में।
2.Chalkewadi Wind Energy Project and its Impact on the Local Environment by Kishore Panwar and Swati Bhawsar
चालकेवाड़ी पवन ऊर्जा संयंत्र और उनका स्थानीय परिवेश पर प्रभाव - किशोर पंवार और श्वेता भावसार [Hindi, PDF]
चालकेवाड़ी पवन ऊर्जा संयंत्र और उनका स्थानीय परिवेश पर प्रभाव - किशोर पंवार और श्वेता भावसार [Hindi, PDF]
जलवायु का संकट बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में, पवन ऊर्जा का दोहन करना पर्यावरण के लिए बेशक हानिरहित लग सकता है। मगर क्या हानिरहित व सरल-सहज लगने वाली पवनचक्कियों की बड़ी-बड़ी पंखियाँ सचमुच अपने स्थानीय परिवेश पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालतीं? यही पता लगाने के लिए अनेक शोध किए गए हैं, जिनमें से एक महाराष्ट्र के सातारा ज़िले में किए गए अध्ययन पर आधारित है। शोध के किरदार हैं एक चील, एक छिपकली और एक पवनचक्की। नतीजे विस्मित करते हैं, पढ़िए।
3.You Take Care of my Children: Brood Parasitism by Vipul Keerti Sharma
तुम सम्भालो मेरे बच्चों को - विपुल कीर्ति शर्मा [Hindi, PDF]
तुम सम्भालो मेरे बच्चों को - विपुल कीर्ति शर्मा [Hindi, PDF]
कुक्कू कैटफिश – गौरतलब है कि यह बिल्ली की हमधब्बा मछली किसी अन्य मछली के मुँह में अपने अण्डे रखने के खूब जतन करती है। वहीं, मादा गोल्डन-आई डक अन्य मादाओं के साथ मिलकर एक ही जगह अण्डे देती है, जिनकी देख-रेख एक अन्य पोषक मादा करती है। जीव जगत में इस तरह अपने बच्चों को किसी और के हवाले करने वाला व्यवहार कई प्राणी करते हैं। विपुल कीर्ति शर्मा के इस लेख में ऐसे ही कुछ विस्मित करने वाले जीवों के व्यवहार का बयान है। पढ़ते हुए सोचिए – आखिर क्यों!
4.World Champion Ten by Aamod Karkhanis
विश्व विजेता दस - आमोद कारखानीस [Hindi, PDF]
विश्व विजेता दस - आमोद कारखानीस [Hindi, PDF]
प्राचीन सुमेरियन सभ्यता में अगर कोई 60 मछलियाँ पकड़ता, तो उसे अपने हिसाब में दस के तौर पर लिखता। वहीं, माया सभ्यता में 20 मछलियाँ पकड़ने पर उसे दस के तौर पर लिखा जाता। कैसे? शिकारी-एकत्रक मानव के लिए गणित चाहे बहुत सीमित रहा हो, जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास होता गया, गणित जटिल, और जटिल होता गया। मगर इस लम्बे सफर में, किस मोड़ पर हमने ‘दस’ के आधार वाली संख्या पद्धति को अपनाया? और क्यों? जानिए आमोद कारखानीस द्वारा गणित के इतिहास पर लिखी लेखों की शृंखला की इस कड़ी में।
5.Weekly Market: The Mathematics of Everyday Life: Part 4 by Anil Singh
साप्ताहिक बाज़ार: दुनियादारी का गणित: भाग-4 - अनिल सिंह [Hindi, PDF]
साप्ताहिक बाज़ार: दुनियादारी का गणित: भाग-4 - अनिल सिंह [Hindi, PDF]
एक स्कूल है जहाँ बच्चे अपना बैंक चलाते हैं। बैंक के पैसों से स्कूल से ज़रूरत के सामान खरीदते हैं। मगर हर बार खरीदना ही क्यों? वे भी कमाई करना चाहेंगे। और इस तरह शुरू होता है आनंद निकेतन में साप्ताहिक बाज़ार! मिट्टी के खिलौने, भिण्डी से ब्लॉक पेंटिंग, बाल्टी-गेंद के खेल – बाज़ार में हर आनन्द की कीमत है और हर कीमत में आनन्द। जानिए, कैसे इस बाज़ार से बच्चे दुनियादारी का गणित सीखते हैं, अनिल सिंह के इस लेख में।
6.Experiments in Democracy Within the School System: Part 4 by Amit and Jayshree
स्कूल के ढाँचे में लोकतंत्र के प्रयोग: भाग-4 - अमित और जयश्री [Hindi, PDF]
स्कूल के ढाँचे में लोकतंत्र के प्रयोग: भाग-4 - अमित और जयश्री [Hindi, PDF]
लोकतंत्र क्या है? क्या महज़ वोट डालकर किसी राजनैतिक प्रतिनिधि को चुन लेना मात्र हमें लोकतांत्रिक बना देता है? समाज में, जन में, जनचेतना में लोकतांत्रिक समझ और मूल्य कहाँ हैं? यदि नहीं हैं, तो क्यों न एक शिक्षण संस्थान के ज़रिए नागरिकों को बचपन से ही इससे जुड़ने और इसे विकसित करने के लिए मौके तैयार किए जाएँ? कुछ-कुछ ऐसी ही सोच के साथ आधारशिला की शुरुआत हुई थी। अमित और जयश्री के इस लेख में उस स्कूल में सतत विकसित किए जा रहे लोकतंत्र के कई पहलुओं को साझा किया गया है। पढ़िए, सोचिए।
7.Jhagdi by Sanjay Kumar Tiwari
झगड़ी: कुएँ में गिरी बाल्टी को निकालने की जुगत - संजय कुमार तिवारी [Hindi, PDF]
झगड़ी: कुएँ में गिरी बाल्टी को निकालने की जुगत - संजय कुमार तिवारी [Hindi, PDF]
आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। झगड़ी इसका एक बढ़िया उदाहरण है। कुएँ में गिरी बाल्टी को निकालने के लिए जुगत करके बनी झगड़ी का सामाजिक ताने-बाने से क्या लेना-देना है, या था, संजय कुमार तिवारी के इस छोटे-से लेख में चाव से पढ़ा जा सकता है।
8.Children Prepared the History of their Own Village: Part 7 by Prakash Kant
बच्चों ने तैयार किया अपने गाँव का इतिहास!: भाग-7 - प्रकाश कान्त[Hindi, PDF]
बच्चों ने तैयार किया अपने गाँव का इतिहास!: भाग-7 - प्रकाश कान्त[Hindi, PDF]
इतिहास किताबों में बन्द है या हमारे आसपास फैला हुआ है? एक कक्षा में शिक्षार्थियों को इतिहास से रूबरू करवाने के अनगिनत तरीके हो सकते हैं, प्रकाश कान्त ऐसे कई तरीके चुनते हैं। अपने गाँव का इतिहास पता करने से शुरू होता हुआ कक्षा का सफर, शिकारी मानवों के हथियारों और औज़ारों को ढूँढ़ने तक जाता है। इस बीच भाषा, लिपियों और इतिहास के अन्य आयामों से बच्चे और उनके शिक्षक जुड़ते-जूझते रहते हैं। प्रकाश कान्त के इस लेख में इतिहास के साथ-साथ एक शिक्षक के फलसफे, जुगत और कुछ अफसोस के पन्ने भी शामिल हैं।
9.Mantoda by Shreya Khemani
मंतोड़ा: आजकल के लइकामन - श्रेया खेमानी [Hindi, PDF]
मंतोड़ा: आजकल के लइकामन - श्रेया खेमानी [Hindi, PDF]
मंतोड़ा, यानी मन को तोड़ देने वाली। यह नाम है इस ‘कहानी’ के एक पात्र का। छत्तीसगढ़ की एक कंपनी में मेहनत का काम करती हैं। बेटी स्कूल में टीचर है। यह कहानी उन दोनों के रिश्ते की कहानी है। मगर इस रिश्ते में और भी कई रिश्ते जुड़े हैं, घुसपैठ भी किए हुए हैं – समाज, परिवार और सत्ता के रिश्ते। कुछ रिश्तों से वे साहस लेती हैं, और कुछ रिश्तों से अपनी लड़ाई लड़ती हैं। श्रेया इस कहानी की गवाही देती हैं – उसे अनुभव करके, उसमें हस्तक्षेप करके, उसे लिखकर साझा करके। पढ़िए!
10.Why Don’t Vehicles Fall While Moving in the Well of Death (Maut Ka Kuan)?
सवालीराम: मौत के कुएँ में चलते वक्त दोपहिया वाहन और कार गिरते क्यों नहीं हैं? [Hindi, PDF]
सवालीराम: मौत के कुएँ में चलते वक्त दोपहिया वाहन और कार गिरते क्यों नहीं हैं? [Hindi, PDF]
आखिर कैसे चकमा देते हैं मौत को मौत ही के कुएँ में? यह कलाबाज़ों का फिज़िक्स है! समझना है तो पढ़िए सवालीराम का विस्तार से लिखा जवाब।
11.The Huge Burrow of a Monitor Lizard by Kalu Ram Sharma
गोह का विशाल बिल - कालू राम शर्मा [Hindi, PDF]
गोह उर्फ मॉनिटर लिज़र्ड। लपलपाती जीभ लेकर घूमने वाली इस छिपकली को क्या कभी बिल बनाते देखा है? इसके बिल कैसे होते होंगे? जानने के लिए पढ़िए कालू राम शर्मा का यह अब तक अप्रकाशित लेख।
गोह का विशाल बिल - कालू राम शर्मा [Hindi, PDF]
गोह उर्फ मॉनिटर लिज़र्ड। लपलपाती जीभ लेकर घूमने वाली इस छिपकली को क्या कभी बिल बनाते देखा है? इसके बिल कैसे होते होंगे? जानने के लिए पढ़िए कालू राम शर्मा का यह अब तक अप्रकाशित लेख।

