(अक्टूबर 1946 - अप्रैल 2026)
बीसवीं सदी जीवन के बुनियादी घटकों की खोज की सदी रही है। वर्ष 1953 में डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड की संरचना की खोज ने इसमें महती योगदान दिया था और स्पष्ट हुआ था कि जीवन का संचालन करने वाली जानकारी किस रूप में सहेजकर रखी जाती है।
इस समय क्रैग वेंटर और उनकी टीम ने यह सवाल उठाकर बात को नई दिशा दी थी – जब हम डीएनए में लिखित कोड को पढ़ सकते हैं, तो उसे लिख क्यों नहीं सकते? यही सवाल संश्लेषण जीव विज्ञान के मूल में है। संश्लेषण जीव विज्ञान का लक्ष्य यह रहा है कि डीएनए कोड को सिर्फ पढ़ने तक रुकने की बजाय एक नया कोड लिखने का प्रयास किया जाए। उस समय तक जीव वैज्ञानिक एक-एक जीन में संशोधन करने का प्रयास कर रहे थे। वेंटर का कहना था कि हमें पूरा जीनोम बनाकर उसे किसी कोशिका में डालना चाहिए। एक मायने में, वे कह रहे थे कि जीव वैज्ञानिकों के जीवन का मात्र अध्ययन करने की बजाय जीवन की रचना करनी चाहिए।
वर्ष 2010 में वेंटर की टीम ने इसे काफी हद तक संभव कर दिखाया था। उन्होंने एक बैक्टीरिया जीनोम का निर्माण किया और उसके ज़रिए एक जीवित कोशिका पर नियंत्रण स्थापित करने में सफलता प्राप्त की। वैसे यह पूर्ण संश्लेषण तो नहीं था क्योंकि जिस कोशिका का इस्तेमाल किया गया था वह पूरी तरह मूल घटकों से कृत्रिम रूप से बनाई नहीं गई थी। लेकिन इस घोषणा ने साबित कर दिया कि जीवन के निर्देशों को प्रयोगशाला में निर्मित किया जा सकता है।
संश्लेषण जीव विज्ञान ने चिकित्सा, ऊर्जा व पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में कई संभावनाएं और चुनौतियां उजागर की हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठा है कि वैज्ञानिकों को किस हद तक जीवन के रचयिता बनने की कोशिश करनी चाहिए, यह सब कौन तय करेगा और इस ताकत के साथ किस तरह की ज़िम्मेदारियां सामने आएंगी।
वैसे, जे. क्रैग वेंटर मानव जीनोम के प्रथम मानचित्रण में भी शामिल रहे थे। (स्रोत फीचर्स)
