ऑक्टोपस आठ भुजाओं वाला विचित्र जंतु है। मज़ेदार बात यह है कि नर अपने शुक्राणुओं को मादा के शरीर में पहुंचाने के लिए इन्हीं में से एक भुजा का उपयोग करते हैं। हेक्टोस्टायलस नामक इस भुजा में इस काम के लिए विशेष परिवर्तन हुए हैं। एक नए प्रीप्रिंट शोध पत्र में बताया गया है कि हेक्टोस्टायलस के चम्मचनुमा अग्र भाग पर रसायनग्राही होते हैं, जो प्रमुख मादा हॉरमोन प्रोजेस्टरोन को भांप सकते हैं।
हारवर्ड विश्वविद्यालय के जीव वैज्ञानिक पाब्लो विलार ने प्रयोगशाला में एक ऑक्टोपस (Octopus bimaculoides) को संभोग के लिए प्रेरित किया। ये जंतु बंदी अवस्था में काफी आक्रामक हो सकते हैं। इसलिए विलार ने नर व मादा ऑक्टोपस को एक्वेरियम के दो अलग-अलग कक्षों में रखा जिनके बीच एक अपारदर्शी दीवार थी और दीवार में छिद्र थे ताकि वे आपस में एक-दूसरे की भुजाओं को छूकर जान-पहचान कर सकें। 
आश्चर्य की बात थी एक-दूसरे को न देख पाने के बावजूद नर ने अपने हेक्टोस्टायलस को छिद्र के पार ले जाकर मादा से संभोग कर लिया। वैसे तो हेक्टोस्टायलस बाकी सात भुजाओं जैसा होता है लेकिन इसके आधार से लेकर सिरे तक एक खांचा होता है। जब यह अंग मादा के अंडाशय तक जाने वाले किसी मार्ग (डिंबवाहिनी) को पहचान लेता है तो वह ढेर सारे शुक्राणु उसमें छोड़ देता है। विलार ने चार जोड़ियों में ऐसा अंधा संभोग देखा।
तो विलार और उनके मार्गदर्शक निक बेलोनो के मन में विचार आया कि क्या हेक्टोस्टायलस रसायनों की मदद से डिंबवाहिनी को भांपता है। बेलोनो और उनके साथी पहले ऑक्टोपस के चूषकों में ऐसे रसायन-ग्राही देख चुके थे। ये ग्राही किसी सतह पर उपस्थित विभिन्न अणुओं को भांप सकते हैं। सामान्य भुजाओं में ये ग्राही भोजन ढूंढने या हानिकारक सूक्ष्मजीवों को पहचानने में मददगार होते हैं। लेकिन हेक्टोस्टायलस में इन ग्राहियों का काम स्पष्ट नहीं था। अनुमान था कि इनका उपयोग संभोग में होता होगा।
इस विचार को परखने के लिए विलार ने बंदी ऑक्टोपसों के बीच की दीवार के छिद्रों पर छोटे-छोटे पात्रों में अलग-अलग रसायन भर दिए। देखा गया कि नर ऑक्टोपस ने अपने हेक्टोस्टायलस से उस छिद्र को ज़्यादा देर तक टटोला जिसके पात्र में मादा यौन हॉरमोन थे।
पता चला कि हेक्टोस्टायलस पर रासायनिक ग्राहियों की संख्या अन्य भुजाओं से तीन गुना अधिक थी। यह भी पाया गया कि सामान्यत: सेफेलोपॉड जंतुओं में हेक्टोस्टायलस में रसायन संवेदना काफी अधिक होती है। ऑक्टोपस की दो अन्य प्रजातियों तथा स्क्विड में काटकर अलग किए गए हेक्टोस्टायलस को प्रोजेस्टरोन के संपर्क में रखने पर उसमें काफी हरकत होती रही।
यह सही है कि ऑक्टोपस का दिमाग बड़ा होता है लेकिन उसकी भुजाएं अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से करती हैं। सवाल है कि ऑक्टोपस का तंत्रिका तंत्र डिंबवाहिनी की खोज का नियमन कैसे करता है। एक संभावना है कि हेक्टोस्टायलस की तंत्रिकाएं प्रोजेस्टरोन के संकेत की तीव्रता भांपते हुए आगे बढ़ने के निर्देश देती हैं। (स्रोत फीचर्स)