थर्मोजेनेसिस यानी जीवों में अपने शरीर में ऊष्मा/गर्मी पैदा करने की प्रणाली। हालांकि हम आम तौर पर सिर्फ पक्षियों और स्तनधारियों को ही गर्म खून (endotherm) वाला मानते हैं, लेकिन सभी जटिल जीव कुछ गर्मी तो पैदा करते ही हैं। कोशिकाओं में मौजूद छोटे पॉवर प्लांट, जिन्हें माइटोकॉन्ड्रिया कहते हैं, भोजन को एक जैविक ईंधन, एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट (ATP) में बदलते हैं। लेकिन, भोजन की ऊर्जा का सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा ही वास्तव में ATP बनता है; बाकी हिस्सा ऊष्मा के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।
कभी-कभी, माइटोकॉन्ड्रिया शर्करा में मौजूद सारी ऊर्जा को ऊष्मा में बदल सकते हैं। पौधों में भी एक एंज़ाइम यही काम कर सकता है जिसका नाम है आल्टरनेटिव ऑक्सीडेज़। अलबत्ता, चंद पौधे ही विशिष्ट कामों के लिए गर्मी पैदा करते हैं।
कमल का पौधा (Nelumbo nucifera) उत्तरी और मध्य भारत मूल का है। यह तालाबों, झीलों और धीमे बहाव वाले जलाशयों में उगता है। गर्मियों की शुरुआत में, कम तापमान पर फूल खिलना शुरू होते हैं। इसके सुंदर फूल तीन से चार दिनों तक खिले रहते हैं। इस अवधि में फूल का अंदरूनी तापमान लगभग 30-35 डिग्री सेल्सियस रहता है, जबकि आसपास का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस तक हो सकता है।
कमल में ऊष्माजनन तब शुरू होता है जब कली की सभी पंखुड़ियों के सिरे गुलाबी हो जाते हैं। इसकी अगली अलसुबह, खिलता हुआ फूल गर्मी छोड़ता है, जो फूल को एक आकर्षक खुशबू छोड़ने में भी मदद करता है। कमल के फूल के केंद्र में शंकु आकार का एक समतल पुष्पासन होता है जिसके ऊपरी सपाट हिस्से पर 10-30 मादा जननांग होते हैं। अन्य ऊष्माजनक पौधों की तरह, कमल में भी मादा अंग पहले परिपक्व होते हैं। खुशबू परागणकर्ता कीटों - मधुमक्खियों और भृंगों - को स्त्रीकेसर की ओर आकर्षित करती है। दोपहर तक पंखुड़ियां बंद हो जाती हैं, जिससे एक आरामदायक, इंसुलेटेड कक्ष बन जाता है जिसमें रात बिताने के लिए कीट शरण लेते हैं।
अगले दिन सुबह फूल खिलने से पहले, फूल के नर जननांग (पुंकेसर) परिपक्व हो जाते हैं। और पराग से लदे परागपोषी कीट फूल से उड़ जाते हैं और दूसरे महकते फूलों पर चले जाते हैं। यह प्रणाली पर-परागण सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन हुई है। पर-परागण से संतति को कई फायदे मिलते हैं। जैसे, अधिक जेनेटिक विविधता और कीट प्रतिरोधक क्षमता। प्रत्येक स्त्रीकेसर एक-एक बीज में तब्दील हो जाता है और पुष्पासन फव्वारे जैसे आकार की फली में परिपक्व हो जाता है।
स्त्रीकेसर जिस हिस्से पर होते हैं, वह हिस्सा फूल के बाकी हिस्सों की तुलना में लगभग 4 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म हो जाता है। वर्ष 2025 में प्लांट फिज़ियोलॉजी में प्रकाशित नतीजों के मुताबिक कैल्शियम आयन गर्मी बढ़ाने के ‘ऑन' स्विच का काम करते हैं। जब गर्म होने का समय होता है, तो इस हिस्से की कोशिकाओं में कैल्शियम का स्तर चार गुना बढ़ जाता है। कैल्शियम माइटोकॉन्ड्रिया में जाता है और उन्हें तेज़ी से काम करने के संकेत देता है। ऊष्मा पैदा करने के लिए, बड़ी मात्रा में जमा स्टार्च और वसा का उपयोग किया जाता है।
एरम कुल के कुछ पौधे कीटों को आकर्षित करने के लिए और अन्य विचित्र कामों के लिए भी ऊष्माजनन का इस्तेमाल करते हैं। ईस्टर्न स्कंक कैबेज नामक पौधा उत्तरी अमेरिका के ठंडे इलाकों में उगता है। हालांकि इसका पत्तागोभी (कैबेज) से कोई सम्बंध नहीं है, लेकिन इसका नाम पत्तागोभी जैसी गंध के कारण पड़ा है, जो थोड़ी सरसों जैसी भी होती है। इस पौधे का फूल वाला तना वसंत के आरंभ में ऊष्मा पैदा करके मिट्टी पर जमी बर्फ को पिघलाकर बाहर निकलता है। भृंगों को इस फूल में मकरंद के साथ-साथ गर्म जगह मिलती है। यहां तक कि मकड़ियां भी कीटों की आवाजाही देखते हुए फूल के नज़दीक ही अपने जाले बुनती हैं।
सार्डीनिया में पाए जाने वाले डेड हॉर्स एरम लिली के फूलों से सड़ांध की गंध आती है। यह पौधा गर्मी का इस्तेमाल डाईमिथाइल डाईसल्फाइड जैसे यौगिकों को तेज़ी से प्रसारित करने के लिए करता है, जिसकी गंध गैस सिलेंडर से रिसती गैस और थोड़ी लहसुन जैसी होती है। सड़ा हुआ मांस ढूंढने वाली मक्खियों को यह गंध बहुत पसंद आती है और वे बड़ी संख्या में इसके पास आ जाती हैं। (स्रोत फीचर्स)