अंतरिक्ष की गुरुत्वाकर्षण रहित दुनिया में विषाणु अर्थात वायरस और जीवाणु यानी बैक्टीरिया की लड़ाई कैसे बदल जाती है?
इस सवाल पर थोड़ा प्रकाश डालता है ओपन-एक्सेस जर्नल प्लॉस बायोलॉजी में प्रकाशित हालिया अध्ययन। इस प्रयोग में जब वैज्ञानिकों ने एशरीशिया कोली (ई. कोली) बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस (फेज) को अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर भेजा, तो इन सूक्ष्मजीवों ने वैसा व्यवहार नहीं किया जैसा ये पृथ्वी पर करते हैं। माइक्रोग्रैविटी (नगण्य गुरुत्वाकर्षण) में संक्रमण तो हुआ, लेकिन समय के साथ वायरस और बैक्टीरिया दोनों ही अलग-अलग तरीके से विकसित हुए। जेनेटिक बदलाव आए, जिनसे वायरस का बैक्टीरिया से जुड़ने का तरीका बदल गया और बैक्टीरिया ने खुद को बचाने के नए हथियार विकसित किए। ये खोज फेज थेरपी (बैक्टीरियाभक्षी वायरस की मदद से उपचार की तकनीक) को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, खासकर दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के खिलाफ।
फेज यानी वे वायरस जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं, और उनके एवं मेज़बान के बीच की लड़ाई सूक्ष्मजीवीय पारिस्थितिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे अक्सर ‘इवॉल्यूशनरी आर्म्स रेस’ (वैकासिक हथियार दौड़) कहा जाता है, जहां बैक्टीरिया वायरस से बचने के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हैं, और वायरस उस सुरक्षा को तोड़ने के नए-नए तरीके ईजाद करते रहते हैं। पृथ्वी पर तो इस लड़ाई का काफी अध्ययन हो चुका है।
लेकिन, नगण्य गुरुत्वाकर्षण में फेज-बैक्टीरिया की खींचातानी पर बहुत कम अध्ययन हुए हैं। इस कमी को दूर करने के लिए, पी. हस और उनके साथियों ने ई. कोली बैक्टीरिया के दो नमूने लिए, जिन्हें टी7 नामक फेज से संक्रमित किया गया। एक नमूना पृथ्वी पर रखा और दूसरा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर।
अंतरिक्ष के अवलोकन
1. संक्रमण की गति में बदलाव
शुरुआत में संक्रमण धीमा हुआ, क्योंकि नगण्य गुरुत्वाकर्षण बैक्टीरिया की शरीर क्रिया और फेज-बैक्टीरिया के टकराव की भौतिकी को प्रभावित करती है। नगण्य गुरुत्वाकर्षण में बैक्टीरिया की कोशिकाएं अलग-अलग तरीके से इकट्ठा होती हैं, जिससे फेज का जुड़ना मुश्किल हो जाता है।
2. आनुवंशिक उत्परिवर्तन
फेज में ऐसे उत्परिवर्तन हुए जो उनकी संक्रमण क्षमता यानी रिसेप्टर्स से जुड़ने की ताकत बढ़ाते हैं। वहीं, बैक्टीरिया में बचाव और अंतरिक्ष में जीवित रहने के नए जेनेटिक बदलाव विकसित हुए। पता चला कि फेज का रिसेप्टर बाइंडिंग प्रोटीन अंतरिक्ष में अलग तरीके से बदलता है।
3. नए रहस्य
अंतरिक्ष के फेज पृथ्वी पर दवा-प्रतिरोधी ई. कोली के खिलाफ ज़्यादा प्रभावी साबित हुए। इससे पता चलता है कि नगण्य गुरुत्वाकर्षण बैक्टीरिया-फेज के सह-विकास को नए तरह से ढालता है, जो सूक्ष्मजीवों के अनुकूलन के बुनियादी सिद्धांतों को चुनौती देता है।
अंतरिक्ष अन्वेषण में सूक्ष्मजीव एक बड़ी चुनौती हैं, क्योंकि वे अंतरिक्ष यान को संदूषित और यात्रियों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। यह शोध कई लिहाज़ से फायदे दे सकता है :
1. यात्रियों की स्वास्थ्य रक्षा
लंबे मिशन (जैसे मंगल यात्रा) में नगण्य गुरुत्वाकर्षण बैक्टीरिया को ज़्यादा खतरनाक बना सकता है, लेकिन फेज उन्हें नियंत्रित कर सकते हैं। इससे अंतरिक्ष में सूक्ष्मजीव के नियंत्रण के लिए नए साधन मिल सकते हैं। मसलन, आईएसएस पर सूक्ष्मजीवों की 3डी मैपिंग दिखाती है कि अंतरिक्ष का वातावरण उनके मेटाबोलाइट्स को बदल देता है, जिससे संक्रमण बढ़ सकता है।
2. ग्रहीय सुरक्षा
अंतरिक्ष में सूक्ष्मजीवों के अनुकूलन को समझने से हम अन्य ग्रहों पर पृथ्वी के जीवों को फैलने से रोक सकते हैं। शोध से पता चलता है कि नगण्य गुरुत्वाकर्षण बैक्टीरिया के जीनोम में बदलाव लाता है, जो अंतरिक्षयान निर्जीवीकरण के नए तरीके सुझा सकता है।
स्वास्थ्य के लिए उपयोगिता
पृथ्वी पर, एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक वैश्विक संकट है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2050 तक इससे एक करोड़ मौतें हो सकती हैं। यह शोध मानव स्वास्थ्य में क्रांति ला सकता है।
अंतरिक्ष में हुए उत्परिवर्तनों के अनुसार फेज को इंजीनियर करके दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के खिलाफ ज़्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।
नगण्य गुरुत्वाकर्षण बैक्टीरिया की प्रतिरक्षा व फेज के विकास को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है, जो पृथ्वी पर संक्रमण मॉडल्स सुधार सकता है। जैसे, अंतरिक्ष में बैक्टीरिया लाइसोजेनिक फेज (जो बैक्टीरिया के जीनोम में छिप जाते हैं) से जुड़े संस्करण विकसित करते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता समझने में मदद करता है।
शोधकर्ताओं का कहना है कि अंतरिक्ष-प्रेरित बदलावों से पृथ्वी पर अत्यधिक सक्रिय फेज बन सकते हैं। इससे अस्पतालों में सुपरबग्स से लड़ना आसान हो सकता है।
पूर्व शोध
अंतरिक्ष में फेज और बैक्टीरिया के आपसी सम्बंध पर शोध नया नहीं है, लेकिन आईएसएस में इसे नई दिशा मिली है। यहां प्रमुख शोधों का क्रमिक अवलोकन दिया जा रहा है।
शुरुआती इतिहास: अंतरिक्ष सूक्ष्मजीव विज्ञान की शुरुआत 1935 में हुई थी, जब बैक्टीरिया को गुब्बारा उड़ान और रॉकेट्स पर भेजा गया। अपोलो मिशन्स (1960-70) में अंतरिक्ष में सूक्ष्मजीवों को जांचा गया था, लेकिन फेज पर ध्यान कम था।
2000 का दशक: आईएसएस के शुरू होने के बाद 2010-2015 में साल्मोनेला और ई. कोली की अंतरिक्ष में बढ़ी आक्रामकता पाई गई, लेकिन फेज शामिल नहीं थे।
2020 फेज इवॉल्यूशन प्रोजेक्ट: रोडियम साइंटिफिक और आइएसएस नेशनल लैब ने फेज इवॉल्यूशन अध्ययन शुरू किया, जहां फेज को अंतरिक्ष में बैक्टीरिया को संक्रमित करने के लिए भेजा गया।
2024 लाइसोजेनिक बैक्टीरिया-फेज अध्ययन: नेचर कम्यूनिकेशन्स में प्रकाशित अध्ययन में आईएसएस से 245 बैक्टीरियल जीनोम्स का विश्लेषण किया गया। पाया कि अंतरिक्ष उड़ान के दौरान बैक्टीरिया में लाइसोजेनिक फेज से जुड़े संस्करण बढ़ते हैं, जो अनुकूलन से जुड़े हैं।
2025 आइएसएस का माइक्रोबियल मैप: सेल जर्नल में, आईएसएस के यूएसओएस में सूक्ष्मजीवों और मेटाबोलाइट्स का 3डी मैप बनाया गया, जो अंतरिक्ष के चरम वातावरण को दिखाता है। इसमें फेज की भूमिका का संकेत मिला है।
2025 में फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलाॅजी में आरएनए वायरस की अंतरिक्ष में लघु-कालिक वैकासिकी पर अध्ययन प्रकाशित हुआ, जो फेज से प्रेरित था। अंतत: ये सभी 2026 के अध्ययन के आधार बने, जो पहली बार पूरे जीनोम अनुक्रम से फेज-मेज़बान के सहविकास पर नज़र रखता है। (स्रोत फीचर्स)
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