मंगल तक पहुंचना मानव जाति का एक बड़ा सपना रहा है, और अब यह सपना सच होता दिख रहा है। लेकिन मंगल पर उतरना ही काफी नहीं है। अगर इंसानों को वहां लंबे समय तक रहना है, तो उन्हें ऐसी मज़बूत और सुरक्षित जगहों की ज़रूरत होगी जो कड़ी ठंड, खतरनाक विकिरण और अकेलेपन से बचा सकें। पृथ्वी से निर्माण सामग्री ले जाना बहुत महंगा और धीमा होगा। इसी वजह से वैज्ञानिक वहीं मौजूद एक संसाधन को समाधान मान रहे हैं - बर्फ। पृथ्वी की प्राकृतिक बर्फीली गुफाओं से प्रेरणा लेकर वैज्ञानिक यह जांच रहे हैं कि क्या मंगल पर भी ऐसे बर्फीले ढांचे बनाए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि मंगल ग्रह सूखा नहीं है। उसकी सतह पर और उसके नीचे काफी मात्रा में बर्फ मौजूद है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बर्फ से ऐसे मज़बूत और गर्मी कैद करने वाले घर बनाए जा सकते हैं, जिनमें मनुष्य रह सकें। ये बर्फीले घर एक तरफ तो विकिरण से सुरक्षा देंगे और दूसरी तरफ सूरज की आवश्यक रोशनी अंदर आने देंगे, जिससे जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को सहारा मिलेगा।
यह विचार भले ही विज्ञान-कथा जैसा लगे, लेकिन वैज्ञानिक इसे लेकर गंभीर हैं। लंबे समय के लिए अंतरिक्ष में इंसानों को बसाने की सबसे बड़ी चुनौती है बार-बार पृथ्वी से रसद भेजना, जो बहुत महंगा और जोखिम भरा है। अगर मंगल पर मौजूद चीज़ों से ही काम लिया जाए, तो खर्च और खतरा दोनों कम हो सकते हैं। बर्फ इस मामले में खास है, क्योंकि इसे संभालना अपेक्षाकृत आसान है और इसके फायदे हैं।
मंगल पर निर्माण के लिए दो मुख्य चीज़ें मानी जाती हैं - बर्फ और रेगोलिथ (धूल-मिट्टी और पत्थरों की परत)। रेगोलिथ में उपयोगी तत्व होते हैं, लेकिन उन्हें निकालने के लिए भारी मशीनें और बहुत ज़्यादा गर्मी चाहिए। इसके उलट, बर्फ को कम ऊर्जा में पिघलाया, ढाला और फिर से जमाया जा सकता है।
ये प्रस्तावित आवास गुंबदाकार होंगे, जिनकी साइज़ लगभग एक हैक्टर होगी। इनके भीतर रहने की जगह, काम करने के हिस्से और खेती के क्षेत्र अलग-अलग होंगे। कंप्यूटर मॉडल बताते हैं कि सिर्फ कुछ मीटर मोटी बर्फ की दीवारें भी मंगल के बेहद ठंडे औसत तापमान (–120 डिग्री सेल्सियस) को अंदर करीब –20 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा सकती हैं। यह तापमान अब भी ठंडा है, लेकिन अतिरिक्त हीटिंग से संभाला जा सकता है और इससे बर्फ पिघलती भी नहीं।
बर्फ की बनावट भी उम्मीद से बेहतर है। शोध बताते हैं कि अगर बर्फ में हाइड्रोजेल जैसे जैविक पदार्थ मिलाए जाएं, तो वह ज़्यादा मज़बूत और लचीली हो सकती है, जिससे दरार पड़ने का खतरा कम होता है। एक बड़ी चुनौती है सब्लीमेशन, यानी मंगल के विरल वातावरण में बर्फ का सीधे भाप बन जाना। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक खास जल-रोधी अस्तर लगाकर इसे रोका जा सकता है, हालांकि ऐसा अस्तर शायद पृथ्वी से ले जाना पड़े।
बर्फ का सबसे बड़ा फायदा सूरज की रोशनी से उसका रिश्ता है। रेगोलिथ के विपरीत, बर्फ हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोकती है लेकिन उपयोगी रोशनी और गर्मी को अंदर आने देती है। तो विकिरण से सुरक्षा मिलेगी, साथ ही पौधे उगाने, नींद के चक्र को ठीक रखने और मानसिक स्वास्थ्य को सहारा देने के लिए ज़रूरी प्राकृतिक रोशनी मिलती रहेगी।
हालांकि इस विचार की कुछ सीमाएं भी हैं। बड़े बर्फीले ढांचे बनाने के लिए भारी मात्रा में बर्फ को संसाधित करना होगा। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी बिजली उपलब्ध होने पर भी रोज़ केवल लगभग 15 वर्ग मीटर बर्फ ही तैयार की जा सकती है। मंगल पर आने वाले धूल भरे तूफान भी समस्या पैदा करेंगे, क्योंकि बर्फ पर जमी धूल उसकी पारदर्शिता और गर्मी रोकने की क्षमता घटा देती है। इसके अलावा बर्फ निकालने के लिए उपकरण तो पृथ्वी से ही ले जाने होंगे।
इन चुनौतियों के बावजूद वैज्ञानिकों का मानना है कि मध्यम अवधि के लिए बर्फ के घर रहवास के लिए काम आ सकते हैं। (स्रोत फीचर्स)