वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के गैबर एगरवैरी और उनके साथियों ने चूहों पर कुछ मज़ेदार प्रयोग करके बताया है कि एक यौगिक है एसिटेट जो उनकी याददाश्त को सुदृढ़ करता है और यह असर सिर्फ मादा चूहों पर होता है। जिस यौगिक की बात हो रही है वह आम तौर पर शरीर में अल्कोहल, ग्लूकोज़ और अधिक रेशेदार खाद्य पदार्थों के विघटन से बनता है।
याददाश्त सम्बंधी दो प्रयोग किए गए थे। पहले प्रयोग में चूहों को दो समान वस्तुओं के साथ 10 मिनट तक खेलने दिया गया। फिर चौबीस घंटे बाद चूहों को उन्हीं वस्तुओं के संपर्क में लाया गया। लेकिन इस बार एक वस्तु की जगह बदल दी गई थी। विचार यह था कि यदि चूहे की याददाश्त अक्षुण्ण रही तो वह समझ जाएगा कि एक वस्तु की जगह बदली गई है। दूसरी ओर, यदि याददाश्त अस्त-व्यस्त हुई होगी तो वे दोनों वस्तुओं के साथ बराबर समय बिताएंगे। चूहों ने नई जगह पर रखी वस्तु के साथ ज़्यादा समय बिताया। यानी पहली बात (अक्षुण्ण याददाश्त) सही है। 
दूसरे प्रयोग में चूहों को एक बार फिर दो एक-सी वस्तुओं के साथ 10 मिनट के लिए छोड़ा गया। 24 घंटे बाद वस्तुएं फिर से रखी गईं लेकिन इस बार एक वस्तु बदल दी गई थी। ध्यान इस बात पर दिया गया था कि क्या चूहे नई वस्तु पर ज़्यादा ध्यान देते हैं, यानी उस पर ज़्यादा समय बिताते हैं।
देखा गया कि जिन मादा चूहों को एसिटेट का इंजेक्शन दिया गया था उन्होंने अन्य के मुकाबले (जिन्हें प्लेसिबो इंजेक्शन दिया गया था) इन दोनों कार्यों में बेहतर प्रदर्शन किया। अलबत्ता, रोचक बात यह रही कि नर चूहों में कोई फर्क नज़र नहीं आया।
शोधकर्ताओं को पता चला है कि एसिटेट मस्तिष्क में जीन्स की अभिव्यक्ति को प्रभावित करता है। वह हिस्टोन प्रोटीन्स में परिवर्तन कर देता है। हिस्टोन्स वे प्रोटीन होते हैं जिनके इर्द-गिर्द डीएनए कसकर लिपटा होता है। जब हिस्टोन पर एसिटेट समूह जुड़ जाते हैं तो यह लिपटना थोड़ा ढीला पड़ जाता है। इसकी वजह से कई जीन्स और कोशिका की आणविक मशीनरी के बीच संपर्क आसान हो जाते हैं। ऐसे में ये जीन्स सक्रिय रहते हैं।
शोधकर्ताओं ने कुछ ऐसे हिस्टोन परिवर्तन भी देखे जिनका सम्बंध दीर्घावधि याददाश्त से जाना-माना है। इसके अलावा एसिटेट ने मादा चूहों के मस्तिष्क के सीखने से सम्बंधित हिस्सों में भी जीन्स की अभिव्यक्ति पर असर डाला था।
एक तो यह महत्वपूर्ण बात रही कि एसिटेट का असर सिर्फ मादा चूहों की स्मृति पर दिखा। दूसरी बात और भी महत्वपूर्ण है। साइन्स सिग्नलिंग पत्रिका में प्रकाशित शोध पत्र में बताया गया है कि एसिटेट तभी कारगर होता है जब मस्तिष्क में तंत्रिका गतिविधि को सीखने की किसी प्रक्रिया के दौरान एसिटेट से सक्रिय किया जाए; यह आम याददाश्त के सुदृढ़ीकरण का तरीका नहीं है। (स्रोत फीचर्स)
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Srote - August 2026
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