कहा तो जा रहा है कि इस वर्ष एल नीनो का कहर टूटेगा। पहला सवाल तो यह होता है कि एल नीनो किस बला का नाम है। दूसरा सवाल यह उठता है कि इसके होने या न होने से क्या फर्क पड़ता है।
मौसम वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी है कि इस वर्ष एल नीनो पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं ज़्यादा दमदार होने वाला है। यदि ऐसा हुआ तो यह अपने साथ दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़, सूखा तथा इन्तहाई मौसमी हालात लाएगा। एक संभावना यह भी व्यक्त की जा रही है कि यदि एल नीनो ज़ोरदार रहा तो अगला वर्ष (2027) तापमान के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगा।
सुपर एल नीनो भविष्यवाणी का एक आधार यह है कि पिछले कुछ महीनों में कटिबंधीय प्रशांत महासागर का सतही तापमान सामान्य से अधिक रहा है। यह आसन्न एल नीनो का अग्रदूत माना जाता है। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों के मन में अभी भी संशय है कि क्या हवाएं और अन्य मौसमी कारक समुद्र की गर्मी को बढ़ाएंगे या वृद्धि को रोक देंगे। यदि वृद्धि तेज़ हुई तो एल नीनो और दमदार हो जाएगा, अन्यथा शायद थोड़ा कमज़ोर हो जाएगा।
यूएस के नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) की चेतावनी के अनुसार काफी संभावना है कि इस साल मई से जुलाई के बीच एल नीनो विकसित होगा। साथ ही यह भी कहा है कि इसकी तीव्रता को लेकर अनिश्चितता है। 
एल नीनो एक जटिल वैश्विक घटना है जो हर 2 से 7 साल में दोहराई जाती है। पिछला एल नीनो 2023-24 में देखा गया था और इसके कई असर हुए थे। इसी के चलते 2024 रिकॉर्ड में सबसे गर्म साल रहा था।
इस वर्ष मध्य एवं पूर्वी कटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक रहा है। (दक्षिणी अमेरिका में औसत से लगभग 1 डिग्री सेल्सियस अधिक।) इसी के आधार पर विभिन्न कंप्यूटर मॉडल्स का अनुमान है कि इस बार का एल नीनो पिछले एल नीनो की अपेक्षा ज़्यादा ज़ोरदार रहेगा।
एनओएए ने 14 मई की रिपोर्ट में कहा था कि 82 प्रतिशत संभावना है कि एल नीनो मई और जुलाई के बीच आ जाएगा और 96 प्रतिशत संभावना इसके दिसंबर में उभरने की है। लेकिन हालिया अवलोकनों के आधार पर एनओएए का मत है कि मात्र 37 प्रतिशत संभावना है कि इस बार का एल नीनो सर्वोच्च तीव्रता की श्रेणी में रहेगा।
युरोपियन सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्ट का अनुमान (1 मई) है कि नवंबर तक समुद्र के पानी का तापमान औसत से 3 डिग्री सेल्सियस अधिक भी हो सकता है।
एल नीनो की तीव्रता प्रशांत महासागर के एक विशेष क्षेत्र (5° उत्तरी अक्षांश से 5° दक्षिणी अक्षांश और 120° पश्चिमी देशांतर से 170° पश्चिमी देशांतर क्षेत्र) में सतही पानी के तापमान के आधार पर मापी जाती है। (स्रोत फीचर्स) 
